निःशुल्क भोजन,अनाथ आश्रम,वृद्धाश्रम,व अन्य नशामुक्ति केंद्र और जनकल्याण इकाइयाँ:
आज के समाज में कई ऐसी स्थितियाँ हैं जहाँ ज़रूरतमंदों को उचित सहारा नहीं मिलता। अकेलेपन की समस्या, आर्थिक विषमता और सामाजिक समर्थन की कमी लोगों को मानसिक, भावनात्मक और जीवनोपयोगी दृष्टि से कमजोर बनाती है। पुष्कर महादेव ट्रस्ट का यह उद्देश्य इन कमजोर वर्गों को सिर्फ आश्रय देने तक सीमित न रहकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और नया सम्मान देना है।
निःशुल्क भोजनालय :
भूख केवल शरीर की नहीं, आत्मा की भी होती है, और जब कोई भूखा हो, तो धर्म, ज्ञान, या सेवा की बात गौण हो जाती है। आज भी हजारों लोग सिर्फ एक समय का भोजन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पुष्कर महादेव ट्रस्ट द्वारा संचालित निःशुल्क भोजनालय का उद्देश्य है कि कोई भी भूखा न सोए:
• हर दिन गर्म, पौष्टिक और सात्विक भोजन।
• विशेष अवसरों पर भंडारा एवं प्रसाद सेवा।
• यात्रियों, निर्धनों और ज़रूरतमंदों के लिए समर्पित सेवा।
• स्वच्छता और गरिमा युक्त भोजन व्यवस्था।
• सेवा में भागीदारी हेतु वालंटियर और दानदाताओं का स्वागत।
अनाथ आश्रम:
आज समाज में ऐसे बच्चे हैं जो प्राकृतिक आपदाओं, गरीबी, परिवारिक टूटने या सामाजिक असमानता के कारण अपने माता-पिता या संरक्षक खो चुके हैं। इन्हें न केवल भोजन, आश्रय और सुरक्षा की ज़रूरत होती है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहारा की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। इस आश्रम में बच्चों को घर जैसा सुरक्षात्मक आॅवास मिलेगा जहां उनकी सरलता, सपनों और मनमर्जी की भी कद्र होगी।
पुष्कर महादेव ट्रस्ट द्वारा प्रस्तावित अनाथ आश्रम बच्चों को सिर्फ एक छत ही नहीं, बल्कि एक परिवार, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण भविष्य की नींव प्रदान करेगा:
वृद्धाश्रम:
गांव- देहात की बात हो या शहरों की वृद्ध व्यक्तियों को समाज में सम्मान होना चाहिए, परन्तु इस आधुनिक युग में वे अक्सर अकेले रह जाते हैं और उनका सामान्य जीवन केवल अस्पताल, टी.वी., अकेलापन जैसी सीमितताओं में सिमट कर रह जाता है। यदि शहरों की बात करें तो यह स्थति अत्यंत भयावह है। आए दिन वृद्धों के प्रति बढ़ती घरेलू हिंसा की ख़बरें मन को व्यथित कर देती हैं। वृद्धों की इस दुःखद असहाय स्तिथि को देखते हुए पुष्कर महादेव ट्रस्ट इस ओर महत्वपूर्ण और जागरूक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे वृद्धाश्रम में उन्हें केवल आश्रय नहीं मिलेगा, बल्कि सम्मान, स्वास्थ्य, आनन्द और सामाजिक सहभागिता का अवसर भी मिलेगा।
यहाँ पोषणयुक्त भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच, योग–ध्यान के माध्यम से उनका स्वास्थ्य बेहतर किया जाएगा। सांस्कृतिक व रचनात्मक गतिविधियों जैसे साहित्य मार्गदर्शन, संगीत–संगोष्ठी, चित्रकला, पारिवारिक त्योहार उत्सव आदि आयोजन होंगे। मानसिक असमर्थता की स्थितियों को संज्ञान में लेकर परामर्श और सामाजिक जुड़ाव की सुविधा रहेगी। बुज़ुर्गों का निर्णय लेने का अधिकार होगा और उन्हें परिवार जैसा वातावरण दिया जाएगा।
नशामुक्ति केंद्र:
नशा आज की पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा सामाजिक खतरा बन चुका है। यह पारिवारिक टूटन, आर्थिक तनाव और अपराध को बढ़ावा देता है। इस केंद्र में प्रभावित व्यक्ति को पुनर्वास का मौका मिलेगा। उनकी इलाज प्रक्रिया में चिकित्सकीय निगरानी, काउंसलिंग, ड्रग-डिटॉक्स, समूह थेरेपी जैसी सुविधाएँ समाहित होंगी।
मनोवैज्ञानिक समायोजन के लिए व्यक्तिगत और समूह-सत्र आयोजित होंगे। जीवन कौशल विकास हेतु शिल्प, हस्तकला, कम्प्यूटर कौशल, कृषि व लाभकारी व्यवसाय संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी के साथ परिवार को भी पुनः समर्थ रूप से समाज में रहने की दिशा में तैयार किया जाएगा। इससे व्यक्ति और परिवार दोनों को जीवंतता एवं आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा।